फ़ॉक्सलेन न्यूज़। देश के नए उपराष्ट्रपति के रूप में सी.पी. राधाकृष्णन का चयन हुआ है। मंगलवार को संपन्न हुए चुनाव में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) उम्मीदवार राधाकृष्णन ने विपक्षी गठबंधन इंडी के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को बड़े अंतर से हराकर विजय हासिल की।
राज्यसभा के महासचिव और चुनाव अधिकारी पी.सी. मोदी ने परिणामों की औपचारिक घोषणा की।
वोटों का अंतर
चुनाव में कुल 781 सांसदों ने मतदान किया। इनमें राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी के खाते में केवल 300 वोट ही आए। इस जीत के साथ राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बनने जा रहे हैं।
बता दें कि जुलाई में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद यह चुनाव आवश्यक हो गया।
चुनावी समीकरण
भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के सदस्यों द्वारा किया जाता है। कुल 788 सदस्यों में से इस बार 7 सीटें रिक्त थीं, इसलिए 781 सदस्य ही मतदान के पात्र थे।
जीत के लिए न्यूनतम 391 वोटों की आवश्यकता थी, जिसे राधाकृष्णन ने आराम से पार कर लिया।
किसके साथ, किसने दिया साथ
एनडीए गठबंधन के पास पहले से ही मजबूत संख्या बल था—लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 129 सांसद।
आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया। पार्टी के पास 11 सांसद हैं।
दूसरी ओर, एआईएमआईएम ने इंडी गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी का साथ दिया।
वहीं, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), बीजू जनता दल (बीजेडी) और शिरोमणि अकाली दल जैसे दलों ने चुनाव से दूरी बनाई।
इसके अतिरिक्त, वारिस पंजाब दे से जुड़े सांसद सरबजीत सिंह खालसा और अमृतपाल सिंह ने भी मतदान का बहिष्कार किया।
उपराष्ट्रपति पद का महत्व
भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है। यह पद केवल संवैधानिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि संसदीय कार्यप्रणाली के संचालन में भी बेहद अहम माना जाता है।
सी.पी. राधाकृष्णन की यह जीत न केवल एनडीए के लिए राजनीतिक मजबूती का संकेत है बल्कि आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।






